आख़िर क्या है नेट न्यूट्रैलिटी ?

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आख़िर क्या है नेट न्यूट्रैलिटी ?

नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब हैं “इन्टरनेट तटस्थता , नेटवर्क तटस्थता” . Net Neutrality एक ऐसा सिधांत हैं जिसके अनुसार इन्टरनेट सेवा प्रदाता कम्पनी को सभी इन्टरनेट सेवाए बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध करानी होती हैं या कह सकते हैं की सभी वेबसाइटों या वेब एप्प  को विजिट करने का ग्राहकों को एक सामान डाटा चार्ज लिया जाये . चाहे वो व्हाट्स एप्प , फेसबुक ,ट्वीटर ,अमेज़न ,फ्लिपकार्ट,स्नैपडील, या अन्य कोई वेबसाइट .

साथ ही किसी भी वेबसाइट की ब्राउज़िंग स्पीड को घटाया और बढ़ाया नहीं जाये . किसी भी वेबसाइट को यूज़ करने के लिए अलग से कोई शुल्क भी नहीं लगाया जाना चाहिए .

भारत में इन्टरनेट सेवा प्रदान कराने वाली कम्पनियों  में मोबाइल सेवा प्रदाता कम्पनियों की अहम् भूमिका हैं . हाल ही में एयरटेल कंपनी के द्वारा एयरटेल जीरो प्लान की घोषणा की गयी हैं .इस प्लान के अंतर्गत एयरटेल यूजर कुछ वेबसाइटों को फ्री में विजिट कर सकते हैं यानि की कुछ वेबसाइटों को विजिट करने पर ग्राहक से कोई भी चार्ज नहीं लिया जायेगा . इसका भुगतान वो वेबसाइट ही करेगी जिसको की विजिट किया हैं . इस प्लान में भारत की प्रमुख ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट  ने भी एयरटेल से समझोता करने का निर्णय लिया था . हालांकि Net Neutrality के विवादों में आ जाने के कारण फ्लिपकार्ट ने इस सम्बन्ध में आगे बढ़ने से मन कर दिया हैं

एयरटेल ने ही घोषणा की थी वो इन्टरनेट से होने वाली कॉल्स के लिए अलग से चार्ज लेगी . हालांकि इस एलान को कम्पनी ने वापिस ले लिया

आईये जानते हैं की अगर नेट न्यूट्रैलिटी खत्म हो गयी तो आप पर

क्या असर पड़ेगा 

आपके फ़ोन का बिल बढ़ जायेगा क्योकि कुछ सेवाओ को यूज़ लेने की लिए आपको अलग से चार्ज देना होगा .

आपको अलग अलग वेबसाइट की  अलग अलग स्पीड मिलेगी .

कुछ वेबसाइट जिनका टेलिकॉम कंपनी के साथ करार होगा उनको आप फ्री में ब्राउज कर पाएंगे .

नेट न्यूट्रैलिटी खत्म करने के पक्ष में टेलिकॉम कंपनियों के तर्क 

कम्पनीयो का मानना हैं की व्हाटस एप्प जैसी सर्विस आने से sms और mms जैसी सेवाये  ग्राहकों के द्वारा बहुत कम काम में ली जा रही हैं जिससे की कंपनियों की आयमें भारी कमी आयी हैं

इसके अलावा कंपनियों का मानना हैं की स्काइप जैसी सेवायो से लम्बी दुरी की कॉल भी इन्टरनेट के माध्यम से की जा सकती हैं जिससे भी उनके राजस्व में कामे आई हैं .

कंपनियों का कहना हैं की उनको लाइसेंस प्राप्त करने की लिए करोड़ों रूपये खर्च करने पड़ते हैं साथ ही इसके बाद नेटवर्किंग में उन्हें बहुत पैसे खर्च करने पड़ते हैं .

 

हालांकि व्हाट्स एप्प जैसी सर्विस आने से इन्टरनेट यूज़ करने वालो की संख्या में भारी इजाफा हुआ हैं . जिससे की डाटा use भी बढ़ा हैं

 

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