बच्चो के लिए जल्दी की जाएगी सामुदायिक सेवा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू -जानिए पूरी जानकारी

विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य की जाए सामुदायिक सेवा,उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू-जानिए

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

 

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भारत के बच्चो की पढाई को लेकर बहुत से बदलाव करने और सुविधा बड़ाने के लिए बहुत कुछ कहा है। आगे की पूरी जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट hindidesh.com से जुड़े रहे यहाँ पर आपको हर तरह की खबर पढने के लिए मिलेगी।

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने युवाओं से श्रील प्रभुपाद जैसे महान संतों और आध्यात्मिक नेताओं से प्रेरणा लेने और अच्छा  इंसान बनने के लिए अनुशासनता से कड़ी मेहनत धैर्य और सहानुभूति के गुणों को आत्मसात करने के लिए कहा जाता है ।

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को सुझाव दिया था। कि स्कूलों और कालेजों में सामुदायिक सेवा को अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि युवाओं में देखभाल करने की भावना भी सृजित करने की जरूरत है। वैष्णव गुरु और इस्कान के संस्थापक श्रील प्रभुपाद की जीवनी ‘सिंग, डांस एंड प्रे: द इंस्पिरेशनल स्टोरी आफ श्रील प्रभुपाद’ के विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा था कि भारतीय सभ्यता एकता, शांति और सामाजिक सद्भाव के सार्वभौमिक मूल्यों के लिए खड़ी रही है।

उन्होंने सदियों पुराने इन सार्वभौमिक मूल्यों को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए आध्यात्मिक पुनर्जागरण का आह्वान किया था । उन्होंने युवाओं से श्रील प्रभुपाद जैसे महान संतों और आध्यात्मिक नेताओं से प्रेरणा लेने और अनुशासन, मेहनत, धैर्य और सहानुभूति के गुणों को आत्मसात करने को कहा।

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने यह कहा था कि , आपको जाति, लिंग, धर्म और क्षेत्र के संकीर्ण विचारों से ऊपर उठकर समाज में एकता, सद्भाव और शांति लाने के लिए काम करना चाहिए। श्रील प्रभुपाद को समतामूलक विचार के पथ प्रदर्शक बताते हुए नायडू ने कहा कि उन्होंने समाज के वंचित लोगों को गले लगाया और उनके जीवन में खुशी का संचार किया।

इससे पहले 16 जुलाई को विजयवाड़ा में स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार दमराजू पुंडरीकक्षुडु की जीवन यात्रा पर एक पुस्तक का विमोचन करते हुए, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने विभाजनकारी एजेंडे के तहत देश की शांति और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने वाली ताकतों और निहित स्वार्थों के खिलाफ बीते दिन आगाह किया था।

उन्होंने जोर देते हुए यह कहा था कि ‘किसी भी संस्कृति, धर्म या भाषा को बदनाम करना ही भारतीय संस्कृति नहीं होती है’। इसके अलावा, उन्होंने प्रत्येक नागरिको  से भारत को कमजोर करने वालों के खिलाफ एकजुट होने और राष्ट्र के हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया गया  था।

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